7 मई 2025 को भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर‘ के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान-प्रशासित कश्मीर में आतंकवादी ठिकानों पर सटीक मिसाइल हमले किए। यह कार्रवाई 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के प्रतिशोध में की गई, जिसमें 26 निर्दोष नागरिकों की जान गई थी।
भारत ने 7 मई को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान-प्रशासित कश्मीर में आतंकवादी ठिकानों पर 24 सटीक मिसाइल हमले किए। इन हमलों में बहावलपुर, मुरिदके, मुज़फ्फराबाद और कोटली जैसे क्षेत्रों में स्थित लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के प्रशिक्षण शिविरों को निशाना बनाया गया। भारतीय वायुसेना ने राफेल जेट्स का उपयोग किया, जो SCALP मिसाइलों और AASM हैमर बमों से लैस थे।
इस ऑपरेशन में भारतीय सेना, वायुसेना और खुफिया एजेंसियों ने मिलकर काम किया। भारतीय सेना के जनरल मनोज पांडे और वायुसेना प्रमुख वी.आर. चौधरी ने इस मिशन का नेतृत्व किया। भारतीय सेना ने दावा किया कि इस ऑपरेशन में लगभग 70 आतंकवादी मारे गए।
कर्नल सोफिया कुरैशी, भारतीय सेना की सिग्नल कोर की अधिकारी, ने ऑपरेशन सिंदूर के बारे में मीडिया को जानकारी दी। वडोदरा, गुजरात की रहने वाली कर्नल कुरैशी ने 17 वर्ष की उम्र में सेना में शामिल होकर कई महत्वपूर्ण मिशनों में भाग लिया है, जिनमें संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशन भी शामिल हैं। उनकी पेशेवर दक्षता और समर्पण ने उन्हें इस ऑपरेशन का प्रमुख चेहरा बनाया।
पाकिस्तान ने इन हमलों को “युद्ध की कार्रवाई” करार देते हुए जवाबी कार्रवाई की धमकी दी। पाकिस्तानी अधिकारियों ने दावा किया कि भारतीय हमलों में 26 नागरिक मारे गए और 46 घायल हुए। हालांकि, भारत ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि हमले केवल आतंकवादी ठिकानों पर केंद्रित थे।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय, जिसमें संयुक्त राष्ट्र, अमेरिका, चीन और रूस शामिल हैं, ने दोनों देशों से संयम बरतने और तनाव कम करने की अपील की है।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ का नामकरण पहलगाम हमले की भयावहता को दर्शाने के लिए किया गया। हमले में हिंदू पुरुषों को निशाना बनाकर उनकी पत्नियों को विधवा बनाया गया, जो भारतीय संस्कृति में ‘सिंदूर’ के प्रतीक से जुड़ा है। इस नाम के माध्यम से भारत ने आतंक के खिलाफ अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाया।
ऑपरेशन सिंदूर’ भारत की आतंक के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” नीति का स्पष्ट उदाहरण है। यह ऑपरेशन न केवल आतंकवादी ठिकानों के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक था, बल्कि यह भारत की संप्रभुता और नागरिकों की सुरक्षा के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है। हालांकि, इस कार्रवाई से क्षेत्रीय तनाव बढ़ा है, लेकिन भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है।
भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के माध्यम से यह स्पष्ट संदेश दिया है कि वह आतंक के खिलाफ किसी भी स्तर पर कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा। यह ऑपरेशन न केवल सैन्य दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति में एक निर्णायक मोड़ भी है।
Post Comment